जलजमाव से थम रहे कदम: तरया सुजान संविलियन विद्यालय के गेट पर भरा पानी, प्रशासन की बेरुखी से ग्रामीण व बच्चे परेशान l

एडिटर इन चीफ अखिलेश कुमार द्विवेदी 9 टीवी भारत समाचार यूपी बिहार मीडिया🖋️🖋️🖋️🖋️
कुशीनगर (सेवरही)। जनपद के विकास खंड सेवरही अंतर्गत संविलियन उच्च प्राथमिक विद्यालय तरया सुजान के मुख्य द्वार पर लंबे समय से जलभराव की गंभीर समस्या बनी हुई है। बारिश और गंदे पानी के ठहराव के कारण विद्यालय आने-जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों, शिक्षकों और ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों और विद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयासों के बावजूद प्रशासनिक उदासीनता के चलते यह समस्या जस की तस बनी हुई है।
जनसहयोग की मिसाल, फिर भी राह अधूरी
समस्या के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर जनसहयोग की अनुकरणीय पहल भी देखने को मिली है:
भूमिदाता का सहयोग: विद्यालय के रास्ते की सुगम आवाजाही के लिए भूमिदाता द्वारा दरियादिली दिखाते हुए 14 कड़ी जमीन दान दी गई है।
शिक्षामित्र की पहल: रास्ते को दुरुस्त करने के उद्देश्य से विद्यालय के शिक्षामित्र श्री प्रमोद ओझा द्वारा व्यक्तिगत रूप से 5 ट्रॉली मिट्टी भी गिरवाई गई। बैजूनाथ बैजू ने कई बार I G R S करने के बाद भी अधिकारियों पर कोई असर नहीं पड़ा।
इसके बावजूद, उचित जल निकासी (ड्रेनेज) की व्यवस्था न होने के कारण पानी का जमाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
शिकायतों पर भी नहीं जागा प्रशासन
ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव की इस समस्या को लेकर तहसील स्तर से लेकर जिला स्तर तक कई बार लिखित आवेदन और ज्ञापन दिए जा चुके हैं। परंतु, बार-बार गुहार लगाने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
“रोजाना बच्चों को पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे हादसों और बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता है। जब जमीन और मिट्टी उपलब्ध है, तो प्रशासन केवल जल निकासी की नाली का निर्माण क्यों नहीं करा पा रहा?”
स्थानीय ग्रामीण का उठते बड़े सवाल:
जनसहयोग के बाद भी बुनियादी ढांचे का निर्माण रुकना किसकी लापरवाही है?
जिला व तहसील प्रशासन को कई बार आवेदन देने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या संक्रामक बीमारी फैलने का इंतजार कर रहा है?
स्थानीय जनता और अभिभावकों ने जिलाधिकारी कुशीनगर एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेकर विद्यालय के मुख्य द्वार पर पक्की नाली का निर्माण कराया जाए और रास्ते को जलभराव मुक्त बनाया जाए




