स्मृति श्रद्धांजलि सभा संपन्न चंचरीक जी को दी गई श्रद्धांजलि

स्मृति श्रद्धांजलि सभा संपन्न चंचरीक जी को दी गई श्रद्धांजलि
संवाददाता कुशीनगर
फिरोज अंसारी अश्क 9 टीवी समाचार भारत UP बिहार MEDIA
हाट स्थानीय श्री नाथ संस्कृत महाविद्यालय में प्रो.जयप्रकाश नारायण द्विवेदी जी की अध्यक्षता में स्वर्गीय त्रिलोकी त्रिपाठी चंचरीक जी को साहित्यकारों ने श्रद्धांजलि अर्पित किया।
सर्वप्रथम स्व. चंचरीक जी के चित्र पर माल्यार्पण पुष्पार्पण हुआ। तदुपरांत चंचरीक जी विरचित सरस्वती वंदना डॉ.परमानंद मिश्र द्वारा प्रस्तुत की गई। वरिष्ठ कवि मधुसूदन मिश्र ने अपनी भावांजलि अर्पित करते हुए….थे ममता की मूरत,करुणा के सागर।
गिरे अश्क यदि तो,
पोछ कर गए तुम।।
लियाकत अली ‘जौहर’
ने संदेश की विकास यात्रा को रेखांकित करते हुए चंचरीक जी को अभिभावक के रूप में याद किया।
एड. अब्दुल हमीद ‘आरजू’ ने चंचरीक जी को पिता तुल्य अग्रज बताते हुए….जो झाँपी तुलसी दर्शन है।
साहित्यिक जग का दर्पन है।
चंचरीक की ख़ामोशी से,मुर्झाया सारा गुलशन है।डॉ.शैलेन्द्र ‘असीम’ ने शब्दार्ध्य देते हुए चंचरीक जी को साहित्यिक संरक्षक के रूप में याद किया…
तुलसी-दर्शन की झाँपी से कली गई कवि-समाज से गुड़ की मीठी डली गई।
चंचरीक बन, दे संदेश मुहब्बत का,
जन्नत की चिड़िया जन्नत को चली गई।
चंचरीक जी के ज्येष्ठ सुपुत्र अनिलकुमार त्रिपाठी ने चंचरीक जी को पिता,गुरु,अध्यापक,चिकित्सक, पंडित और गुरु के रूप में याद किया।
चंदेश्वर ‘परवाना’ चंचरीक जी से शुरुआती संबंधों को स्मृति पटल पर लाते हुए भावुक हो गए….चंचरीक पक्षी उड़ल,जाने कवने देस।
चहकत ऊ संदेश अब,
भइल शोक संदेश।। डॉ.घनश्याम तिवारी ने चंचरीक जी को सकारात्मक व्यक्तित्व, संगठन कर्ता, महाविभूति के रूप में स्मरण किया।
दोहा सम्राट कृष्णा श्रीवास्तव ने शब्दांजलि अर्पित की…सूक्ष्म रूप में हैं यहाँ, चंचरीक कविराज याद सभी हम कर रहे, हाथ जोड़कर आज।।
अध्यक्षता कर रहे प्रो.जयप्रकाश नारायण जी ने कहा कि रससिद्ध कवि ,जो भूत भविष्य वर्तमान को संरेखित करता है,सशरीर उपस्थित न होते हुए भी सूक्ष्म शरीर से ज्यादा प्रभावी हो जाते हैं। चंचरीक जी पर एक स्मृति अंक और पुरस्कार प्रदान करने का प्रस्ताव दिया।
संदेश के आदिपुरुष के रूप में चंचरीक जी को प्रणाम करते हुए उन्हें लोकधर्मी कवि बताया।
संदेश के अध्यक्ष रामजी कुशवाहा,वरिष्ठ अधिवक्ता अनिरुद्ध मिश्र,डॉ.मोहन पाण्डेय ‘भ्रमर’, डॉ.संपूर्णानंद दुबे,अग्निवेश मणि,राजीव पाण्डेय,पंकज मणि, अक्षय गिरी,भावना द्विवेदी सहित अनेक महानुभावों ने उपस्थित रहकर चंचरीक जी को याद किया। संचालन सच्चिदानन्द पाण्डेय ने किया। अंत में दो मिनट का मौन रखकर त्रिलोकी त्रिपाठी ‘चंचरीक’ जी को श्रद्धांजलि दी गई।




