घर से बेघर हो बैठे,हम रोटी के चक्कर में–कवि सुनील कुमार अंकुर

प्रभात साहित्य सेवा समिति की 391वीं काव्य गोष्ठी संपन्न
संवाददाता कुशीनगर
फिरोज अंसारी अश्क 9 टीवी समाचार भारत UP बिहार MEDIA
कप्तानगंज नगर की साहित्यिक संस्था प्रभात साहित्यघर से बेघर हो बैठे,हम रोटी के चक्कर में–कवि सुनील कुमार अंकुर सेवा समिति की 391वीं मासिक काव्य गोष्ठी शुक्रवार की रात्रि में कवि विनोद गुप्ता के आवास पर संपन्न हुई। जिसकी अध्यक्षता बेनी गोपाल शर्मा ने किया और संचालन बेचू बीए ने किया। मुख्य अतिथि रहे भाजपा नेता वमंडल अध्यक्ष हरे राम गुप्त।
सर्वप्रथम मां शारदे के चित्र पर अतिथि और मेजबान व अध्यक्ष द्वारा पुष्पार्चन अर्पित करने के बाद मां शारदे की वंदना से विनोद गुप्ता ने काव्य गोष्ठी का शुभारम्भ किया ।
इन्होंने वीर रस की यह कविता सुनाई “झांसी की रानी की गाथा याद कभी जब आता है तब रगों में रक्त उबलता है चौड़ी छाती हो जाता है ”
इसके बाद नूरुद्दीन नूर ने कुछ यूं सुनाया-
“यूं ही आजमाएंगे तुमको याद
आएंगे”
कवि सुनील कुमार अंकुर ने बेरोजगारी को लेकर यह रचना सुनाया-
” घर से बेघर हो बैठे, हम रोटी के चक्कर में”
वही वरिष्ठ शायर डॉक्टर इम्तियाज समर ने यह सुनाया “मोहब्बत में हमें महबूब से बस ये शिकायत है,
हमें दरिया दिखा देती है प्यासा छोड़ देते हैं”
वहीं बेनी गोपाल शर्मा ने यह सुनाया –
80 वर्ष की उम्र में भी शौर्य बनी जिसकी पहचान” संचालन कर रहे कवि बेचू बीए ने यह गीत सुनकर गोष्ठी को ऊंचाई प्रदान किया-
“आसमान के चंचल पंछी मन महकाओ ना, चलो गीत गाओ ना कोई गीत गाओ ना”
मेजबान की नतनी कुमारी आराधिता गुप्ता ने भी रचना पाठ की।इस मौके पर डा अजय कुमार कुशवाहा, करन अग्रहरि, दिलीप कुमार, अनिता गुप्ता आदि मौजूद रहे।




