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केहू के सपनवा सुघर तूर देला, गरीबी के बोझा कमर तूर देला– अश्वनी द्विवेदी 

 

कवि बेचू बी ए के मां की 19 वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ 

संवाददाता कुशीनगर 

फिरोज अंसारी अश्क 9 टीवी समाचार भारत UP बिहार MEDIA 

कप्तानगंज नगर पंचायत के मां सुदामा देवी काम्प्लेक्स में कवि बेचू बी ए के मां की 19 वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में प्रभात साहित्य सेवा समिति के तत्वाधान में काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसके मुख्य अतिथि संस्था के संरक्षक और स्वामी विवेकानंद सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य दिनेश यादव रहे।

सर्वप्रथम कवि बेचू बी ए के मां के चित्र पर पुष्प अर्जित किया गया उसके बाद काव्य गोष्ठी का आगाज सरस्वती वंदना धीरज राव- मां के अन्हरिया भगाई दी हे मैया लटके ना पाई, से हुआ। उसके बाद अरमान मंसूरी ने अपनी रचना -बहुत याद आते हो तुम, सुना कर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया उसके बाद विनोद गुप्ता ने- इकट्ठा कर लो जितना भी, नहीं कोई साथ जाएगा, सुनाया इसके बाद आवाज के धनी भोजपुरी के सम्राट अश्वनी द्विवेदी नमन ने- केहु के सपनवा सुघर तूर देला, गरीबी के बोझा कमर तूर देला, सुना कर मंच को ऊंचाई प्रदान किया वही मनोहर माही ने -माई हो गईलू तू टुअरा बना के ,बेटवा के केहु नहीं आस हो, रंजन शुक्ला ने अपनी रचना- दिन भर अकेले में मां-बाप की याद में रोता हूं, सुनाया वही धीरज राव ने- जो मेरे पास आना नहीं चाहता, मैं भी उसको बुलाना नहीं चाहता, सुना कर वाह वाही लूट लिया मंजूर हसन ने अपनी रचना- मां की दुआ में जितनी परवाज मिलती है, बेटे को हर मोड़ पर आवाज मिलती है सुनाया आशुतोष सैनी ने- कभी ना भूलनी बात मां को याद करनी है सुनाया मेजबान कवि बेचू बी ए ने बहुत भावुक होकर जब मां पर रचना सुनाया तो पूरी महफ़िल गमगीन हो गई – जब भी रोय बचपन में मां ने है दूध पिलाया, इसके बाद बेनी गोपाल शर्मा ने अपनी रचना- मां की ममता तले हर कोई जिंदा है, देव है मानव है या परिंदा है, वही कन्हैया लाल करुण ने त्याग और समर्पण की मूरत है मां सुनाया आनंद अनुज ने अपनी रचना -जिसके आंचल तले सजती दुनिया रहे, वो दामन कभी ना छुड़ाया करो ,सुना कर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया शायर फिरोज अश्क लक्ष्मीगंजवी ने अपनी रचना -मेरी जिंदगी मेरी जां है वो, एक नेमत रवां दवां है वो, सुकूं मिलता है आगोश में जिसके, कोई और नहीं मेरी मां है वो सुनाया तो श्रोतागण झूम उठे।

इस काव्या गोष्ठी में श्रोतागण गुड्डू राईन, हरे राम गुप्ता, शिव कुमार रौनियार, सोनू गलाई वाला, श्याम बहादुर, राजन साहनी, सत्यम वर्मा, रियाज राइन आदि लोग मौजूद रहे संचालन शायर फिरोज अश्क लक्ष्मीगंजवी ने किया आखिर में मेजबान कवि बेचू बी ए ने सबका आभार व्यक्त किया।

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