कातिल उहै गर्दन उहै तलवार बदलल बा–सुभाष संगीत

प्रखर साहित्य संगम की 133 वीं काव्य गोष्ठी संपन्न
संवाददाता कुशीनगर
फिरोज अंसारी अश्क 9 टीवी समाचार भारत UP बिहार MEDIA
ओंकारेश्वर महादेव मंदिर बेलवा कारखाना के प्रांगण में ‘प्रखर साहित्य संगम ‘ की १३३वीं काव्यगोष्ठी ‘अग्रहार ‘ के अध्यक्ष सार्जेंट अभिमन्यु पाण्डेय ‘मन्नू’ के मुख्य आतिथ्य तथा निराला संवाद मंच के अध्यक्ष ओम् प्रकाश द्विवेदी ‘ओम्’ की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई; जिसमें उत्तर प्रदेश तथा बिहार से पधारे कवियों ने सुधी श्रोतागण के सम्मुख अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर वाहवाही लूटीं।
कवि गोष्ठी का श्रीगणेश पूर्व संगीताचार्य मंगल प्रसाद की वाणी वंदना ‘मां शारदे वरदान दे’ से हुआ। तत्पश्चात शुकदेव महाविद्यालय के प्रबंधक ब्रजेश त्रिपाठी ने ‘मां तुम हो पूरा ब्रह्मांड’ कविता से नारी की महत्ता को उजागर किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सार्जेंट अभिमन्यु पाण्डेय ‘मन्नू’ की ‘बसंत’ शीर्षक पर श्रृगारिक रचना हल्की-हल्की सी गर्मी कभी हल्की-हल्की ठंड है;शीतल-शीतल मंद पवन में मीठी-मीठी सुगंध है;पर खूब तालियां बजीं।बिहार प्रदेश से पधारे ‘जय भोजपुरी जय भोजपुरिया’ के संस्थापक भोजपुरी के गीतकार/ गजलकार सुभाष ‘संगीत’ ने अपनी भोजपुरी गजल ‘ सूरत उहै कीरत उहै किरदार बदलल बा; क़ातिल उहै गरदन उहै तलवार बदलल बा’ सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कहानी उपन्यास कार/गीतकार सत्य प्रकाश शुक्ल ‘बाबा’ ने अपने चिर परिचित अंदाज में ‘मेजे पर चिखना गिलास बा। सचमुच में तहवैं विकास बा।पपुआ के ताना ना मरला किरिया खा ना’ सुनाकर खूब हंसाया। कवि नथुनी राय ‘व्यथित’ ने श्रृंगारिक रचना ‘ऐ मेरे हम सफर,यूं खफा होकर, दूर नजरों से मेरी जरा भी न जा’ प्रस्तुत कर समां बांधा। भूपेन्द्र राय ‘गंवार’ ने नीति परक दोहे सुनाकर सबका मन मोह लिया। ओमप्रकाश ओम् ने श्रृंगार रस ‘अंखिया से अंखिया मिलाओ रे सांवरिया’ सुनाया।अंत में कार्यक्रम के आयोजक प्रखर साहित्य संगम के अध्यक्ष वरिष्ठ कवि श्याम नारायण गुप्त ने अपनी सुन्दर रचना ‘सनातन धर्म हमारा;जगत में सबसे प्यारा’ सुनाकर आए हुए अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
प्रखर साहित्य संगम के महासचिव संतोष ‘संगम’ ने ‘पहिले पहिले प्यार में भाव बहुत देहलू’ रचना के साथ छंदों , दोहों लोकोक्तियों से सजा-धजा कर कवि गोष्ठी का भावपूर्ण संचालन किया ।
नागेन्द्र पाण्डेय,राम चंद्र गुप्त,भरत वर्मा आदि कवियों की भी रचनाएं सराही गईं।
हरिहर सिंह, पुजारी शास्त्री जी
,श्रीराम मिश्र आदि तमाम श्रोता उपस्थित रहे।




