निराला शब्द संवाद मंच की 57 वीं गोष्ठी संपन्न

निराला शब्द संवाद मंच की 57 वीं गोष्ठी संपन्न
संवाददाता कुशीनगर
फिरोज अंसारी अश्क 9 टीवी समाचार भारत UP बिहार MEDIA
निराला शब्द संवाद मंच की 57 वीं गोष्ठी हनुमान इण्टर मीडिएट कालेज पडरौना कुशीनगर के सभागार में सम्पन्न हुई
जिसमें कुशीनगर केशरी के सम्पादक आदित्य श्रीवास्तव, फिरोज अश्क, व डॉ बलराम राय हिन्दी साहित्य भारती सम्मान से नवाजे गये।
गोष्ठी व सम्मान समारोह का आयोजन मंच के अध्यक्ष डॉ ओमप्रकाश द्विवेदी ओम
के 57वें वैवाहिक दिन के उपलक्ष में किया गया था। अध्यक्षता व संचालन स्वंय डॉ द्विवेदी ने किया जबकि मुख्य अतिथि प्रसिद्ध कवि व ज्योतिषी नन्दलाल मणि त्रिपाठी व विशिष्ट अतिथि दिनेश गोरखपुरी रहे।समीक्षक का उत्तरदायित्व डॉ रामनरेश दूबे कृत आचार्य हिन्दी विभाग यूं मन पी जी कालेज पडरौना, सारस्वत अतिथि पूर्व प्रधानाचार्य मदन मोहन पाण्डेय, डॉ मधुसूदन पाण्डेय व आर के भट्ट रहे। गणेश वन्दना डॉ ओमप्रकाश द्विवेदी ओम, सरस्वती वन्दना प्रधानाध्यापिका श्रीमती आशा शर्मा ने कोकिल कण्ठ से वादन किया आगंतुक कवियों ने अपने अपने अन्दाज में कविता पाठ किया। सुरेन्द्र गोपाल ने फकत जज्वात से क्या होता है।
प्रख्यात कवि बेचू बी एक ने गीत तक जायेंगे तेरे पांव,धीरे धीरे चल रे साथी ,राघव शरण मिश्र ने नफ़रत कुछ दिवाल कभी गिर सकती है–
श्रीमती आशा शर्मा ने एक माई रोवर देखनी,एक राशि जरत देखनी,दहेजवा के खातिर –मशहूर शायर फिरोज अंसारी अश्क ने किसी पे अंगुली उठाना आसां है बहुत, खुद पे अंगुली उठाओ तो कलमकार कहूं, डॉ सुनील सावन ने धर्म शील सद्कर्म ही तो जान है भैया, डॉ मधुसूदन पाण्डेय ने सावन सुहावना लगे मनभावन —राणा प्रताप सिंह ने नदियां सड़ रही है–आर के भटृट बावरा ने जितनी भी कहानी पढ़ा– डॉ बलराम राय ने भूलना सारे रिश्ते दया भी कभी, दिनेश गोरखपुरी ने कंस बन की भोजपुरी में दोहा व चौपाई – मिलल खबर जब कंस के– मुख्य अतिथि नन्दलाल मणि त्रिपाठी ने हिन्दी बाल की विन्दी–तो भरत तिवारी हत्या काण्ड पर भोजपुरी में लिखी रचना डॉ ओमप्रकाश द्विवेदी ओम ने कांव कांव कौआ बोले,आधी रात टिटिहिरी रे–मदन मोहन पाण्डेय ने चिर-परिचित अंदाज में रचना पढ़ी। डॉ रामनरेश दूबे ने विधिवत समीक्षा की। सभी साहित्यकारों ने डॉ ओमप्रकाश द्विवेदी ओम के 57 वीं बैबाहिक दिन पर ढेर सारी शुभकामनाएं दी। विद्यालय के प्रबन्धक मनोज कुमार सारस्वत ने आगन्तुक साहित्यकारों का अंग वस्त्रम् से स्वागत किया।




