गंग-ओ- जमन की धार है हिंदी- अब्दुल हमीद –आरजू

गंग-ओ- जमन की धार है हिंदी- अब्दुल हमीद –आरजू
ब्यूरो चीफ कुशीनगर
फिरोज अंसारी अश्क 9 टीवी भारत समाचार यूपी बिहार मीडिया
देवशिल्पी विश्वकर्मा जयंती के शुभ अवसर पर साहित्यिक, सामाजिक व सांस्कृतिक संस्था “संदेश” और असीम साहित्य संस्थान के तत्तवावधान में श्री नाथ संस्कृत महाविद्यालय,हाटा के सभागार में स्थानीय लेखक, साहित्यकार एवं कवियों की मासिक वैचारिक गोष्ठी एवं काव्य पाठ का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के अध्यक्ष मशहूर शायर एड. अब्दुल हमीद “आरजू” व मुख्य अतिथि लेखक अजय वर्मा रहे। संचालन डॉ. सच्चिदानन्द पाण्डेय ने किया।
काव्य गोष्ठी का शुभारम्भ प्रद्युम्न कुमार सोनी ने माँ सरस्वती की वंदना भोजपुरी गीत “कारज सफल कर मोरी मैया..” के साथ किया।
तत्पश्चात अनवर सफी ने “मेरी ख्वाहिश है ,सपना है …” कविता की शानदार प्रस्तुति दी।
कवियों की श्रृंखला को बढ़ाते हुए युवा कवि अक्षय गिरी ने “माता-पिता गुरु पूजिए..”, “यूं तो हम थकते नहीं..” तथा भोजपुरी गीत “नैना नेहिया से छलकता अब रात दिन..” की प्रस्तुति देकर वाहवाही बटोरी ।डॉ मोहन पाण्डेय ‘भ्रमर’ ने गंभीर विषय की कविता चुनते हुए भोजपुरी निर्गुण “पनघट त दूर ना बुझाला , छलकत गगरिया काहे जाला सजनिया..” और “कठिन डगरिया संभारी के चला ना…” गाकर सबको जीवन का मर्म समझाया। ‘संदेश’ के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत शिक्षक रामजी कुशवाहा ने गद्य पाठ का वाचन करते हुए साहित्य के विषय में बहुत ही रोचक बात कही कि साहित्य विविध विधाओं जैसे – गद्य , पद्य, कहानी , संस्मरण, उपन्यास आदि में बँटकर भी ठीक उसी प्रकार एक ही है जैसे कि एक ही शराब भिन्न-भिन्न बोतलों में परोसी जा रही हो।
काव्य गोष्ठी की अगली कड़ी थे उर्दू शायर एवं गजलकार लियाकत अली “जौहर” जिन्होंने अपनी ग़ज़ल
“हर समंदर हर नदी है आपकी ,फिर भी प्यासी जिंदगी है आपकी।” सुनाकर श्रोताओं को ताली बजाने पर मजबूर कर दिया।
हिंदी एवं संस्कृत के विद्वान कवि विनोद पाण्डेय ने एक चतुष्पदी (रुबाई) “प्रथम ज्ञान निज जननी से…” सुनाकर भारत माता की वंदना की। उसके पश्चात भोजपुरी गीत “प्यार के बेकरारी उनहू में जागल…” सुनाकर श्रोताओं को प्रेम रस से सराबोर कर दिया ।
कवि अनिल त्रिपाठी ने हिंदी पखवाड़े में हिंदी की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा-
,”मेरा परिचय है कि अपने ही घर में पराई हुई हिंदी हूँ मैं।”
संपूर्णानंद द्विवेदी ने स्नेही जनों के बीच अपनी उपस्थिति को अपना सौभाग्य बताया।
कार्यक्रम की थकान को मिटाने के लिए शैलेंद्र ‘असीम’ ने मुक्तक
“रजनी तारे जुगनू बादल…” और एक बहुत ही रोमांटिक गीत-
“सतरंगे जीवन की एक शाम हँसती सी”
की प्रस्तुति दी।
दोहा रचनाकार एवं अधिवक्ता कृष्ण कुमार श्रीवास्तव ने
“व्याकरण को त्याग कर हम तो अहम में आ गए ..” और
“कबीर, सूर तुलसी से हुई धनवान है हिंदी..”
की प्रस्तुति देकर हिंदी की महत्ता के बारे में बताया।
मुख्य अतिथि अजय वर्मा ने कहा कि वह तो विद्वान साहित्यकारों के बीच सीखने आए थे किंतु आप सभी ने मुख्य अतिथि बनाकर आभारी बना दिया।
उन्होंने काव्यपाठ करते हुए
“पहचान भूल गया हूं..” के साथ सभी विद्वतजनों का आभार जताया। कार्यक्रम के अंत में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में अब्दुल हमीद “आरजू” ने सभी कवियों एवं साहित्यकारों को अपना बहुमूल्य समय निकालकर गोष्ठी को सफल बनाने में योगदान देने हेतु आभार जताते हुए शानदार गजल-
“हमारे मुल्क का मजहब हथेलियां है ये..” और ” गंग- ओ -जमन की धार है हिन्दी..”
की शानदार प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम के स्थगन की घोषणा की।



