कुशीनगर में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर फूटा गुस्सा

कुशीनगर में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर फूटा गुस्सा
डिप्टी सीएम को पत्र लिख निजी अस्पतालों की मनमानी और धांधली की उच्चस्तरीय जांच की मांग
संवाददाता कुशीनगर
फिरोज अंसारी अश्क 9 टीवी भारत समाचार यूपी बिहार मीडिया
कुशीनगर जनपद में सरकारी और निजी अस्पतालों की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था तथा मरीजों के आर्थिक शोषण का मामला अब शासन स्तर पर पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता मदन गोविन्द राव ने उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक को पत्र भेजकर जिले के स्वास्थ्य महकमे में व्याप्त भ्रष्टाचार, निजी अस्पतालों की लापरवाही और सरकारी सुविधाओं के अभाव की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पत्र में हाल ही में कप्तानगंज स्थित ‘सच्चिदानंद अस्पताल’ में चिकित्सीय लापरवाही से हुई एक मासूम बच्ची की मौत का प्रमुखता से उल्लेख किया गया है। ग्राम अमडरिया निवासी अश्विनी मिश्रा की बच्ची की मौत के बाद प्रशासनिक संवेदनहीनता के विरोध में परिजनों और स्थानीय नागरिकों को शव के साथ लगभग 30 किलोमीटर पैदल चलकर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करना पड़ा था। पत्र में बताया गया कि इसी अस्पताल पर पूर्व में नवजात शिशु की अदला-बदली का भी गंभीर आरोप लग चुका है।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल
शिकायती पत्र के अनुसार कोटवा, दुदही, पडरौना, कसया और तमकुही सहित कई क्षेत्रों में निजी अस्पताल मरीजों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग केवल दिखावे के लिए अस्पतालों को सील करता है और बाद में साठगांठ कर उन्हें पुनः बहाल कर देता है।
सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कमी
सरकारी तंत्र की बदहाली उजागर करते हुए कहा गया कि:
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्सरे व अन्य पैथोलॉजिकल उपकरण बंद पड़े हैं, जिससे मरीजों को बाहर से महंगी जांच करानी पड़ रही है।
सरकारी दवाओं को अमानक बताकर मरीजों को बाहर की दुकानों से दवा खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है।
जननी सुरक्षा योजना का वास्तविक लाभ जच्चा-बच्चा तक नहीं पहुंच पा रहा है।
मदन गोविन्द राव ने डिप्टी सीएम से मांग की है कि कप्तानगंज घटना के दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और सरकारी अस्पतालों में दवाओं व सुविधाओं का भौतिक सत्यापन कराकर जनता को राहत दी जाए।




