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गंडक नदी का कहर: बाढ़ के पानी में सिमटी ग्रामीणों की दुनिया, छतों और रेलवे पटरियों पर शरण लेने को मजबूर

गंडक नदी का कहर: बाढ़ के पानी में सिमटी ग्रामीणों की दुनिया, छतों और रेलवे पटरियों पर शरण लेने को मजबूर

कुशीनगर / वाल्मीकिनगर

एडिटर इन चिप अखिलेश कुमार द्विवेदी 9tv भारत समाचार यूपी बिहार मीडिया

नेपाल और वाल्मीकिनगर बैराज से लगातार भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने (डिस्चार्ज) के बाद बड़ी गंडक (नारायणी) नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से कुशीनगर के खड्डा, तमकुहीराज और आसपास के तटीय इलाकों के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे स्थिति बेहद विकट हो गई है।

रेलवे ट्रैक और छतों पर आशियाना: बाढ़ का पानी घरों में घुसने के बाद महादेवा, शालिकपुर समेत कई गांवों के लोग अपना सामान लेकर रेलवे पटरियों, छतों और ऊंचे स्थानों पर रात बिताने को मजबूर हैं।

नाव ही एक मात्र सहारा: सड़क संपर्क पूरी तरह टूटने के कारण प्रभावित क्षेत्रों में छोटी डोंगी से लेकर बड़ी नावें ही आवागमन और राहत सामग्री पहुंचाने का एकमात्र जरिया बनी हुई हैं। NDRF और SDRF की टीमें लगातार बचाव कार्य में जुटी हैं।

गर्भवती महिला का रेस्क्यू: मरचहवा गांव में बाढ़ के पानी के बीच फंसी छह माह की गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने पर SDRF की टीम ने नाव से सुरक्षित निकालकर नौरंगिया पहुंचाया।

बांध टूटने की अफवाह से हड़कंप: जर्दी दयाल छपरा के पास बांध में रिसाव की खबर से इलाके में अफरातफरी मच गई। हालांकि, प्रशासन और ग्रामीणों ने स्थिति को संभाला।

सरकारी नाव की मांग: गोलाघाट स्थित सरकारी पीपा पुल बह जाने के कारण स्थानीय लोगों ने आवागमन की सुविधा के लिए स्थायी रूप से सरकारी नाव चलाने की मांग की है।

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