ओजस्वी मिश्रा: छोटे गांव से निकला वह युवा, जिसने समाजसेवा को बनाया जीवन का संकल्प

ओजस्वी मिश्रा: छोटे गांव से निकला वह युवा, जिसने समाजसेवा को बनाया जीवन का संकल्प
तमकुहीराज क्षेत्र के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर आज शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों की बड़ी मिसाल बन चुका है।
एडिटर इन चिप अखिलेश कुमार द्विवेदी 9tv समाचार भारत यूपी बिहार मीडिया
कुशीनगर जिले के तमकुहीराज क्षेत्र के समीप एक छोटे से गांव के साधारण परिवार में जन्मे ओजस्वी मिश्रा बचपन से ही मेधावी और जिज्ञासु छात्र रहे। प्रारंभिक शिक्षा कुशीनगर से पूरी करने के बाद उन्होंने महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली से बीटेक की शिक्षा प्राप्त की। तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता भी निरंतर मजबूत होती गई।
कॉलेज जीवन में ही मिश्रा ने अपने मित्रों के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण अभियान शुरू किया। रक्तदान जैसे सामाजिक कार्यों के माध्यम से उन्होंने एक हजार से अधिक जरूरतमंद लोगों की सहायता का प्रयास किया। यही छोटी-छोटी पहल आगे चलकर उनके जीवन के बड़े उद्देश्य में बदलती चली गई।
बीटेक के बाद सिविल सेवा की तैयारी के लिए दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर पहुंचे ओजस्वी मिश्रा ने अपने सामने उपलब्ध अनेक करियर विकल्पों
के बजाय समाज और देश की सेवा को प्राथमिकता दी। ओल्ड राजेंद्र नगर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद उन्होंने छात्रों की सुरक्षा और न्याय की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व किया। इस घटना ने उनके भीतर की सामाजिक चेतना को और मजबूत किया और उन्होंने व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से आगे बढ़कर समाज के लिए काम करने का संकल्प लिया।
आज रामज्ञानी फाउंडेशन के माध्यम से ओजस्वी मिश्रा शिक्षा से वंचित बच्चों की मदद, पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान, सड़क सुरक्षा, हेलमेट वितरण और महिला सशक्तिकरण जैसे अनेक क्षेत्रों में सक्रिय हैं। वहीं पूर्वांचल गौरव सम्मान यात्रा के माध्यम से वे पूर्वांचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
ओजस्वी मिश्रा की कहानी इस बात की मिसाल है कि समाज में बदलाव लाने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती। जरूरत होती है तो केवल संवेदनशील सोच, दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास की।
आज वे उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो अपने सपनों के साथ-साथ समाज के लिए भी कुछ सार्थक करने का संकल्प रखते हैं। उनका जीवन संदेश देता है—“सफलता केवल स्वयं आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ाने में भी है।”




