साहित्यिक संस्था प्रभात सेवा समिति के तहत हिंदी दिवस पर कवियों ने कविता पाठ से शमां बांधा

साहित्यिक संस्था प्रभात सेवा समिति के तहत हिंदी दिवस पर कवियों ने कविता पाठ से शमां बांधा
अध्यक्ष स्व इंद्र को दी गई श्रंद्धाजलि
ब्यूरो चीफ कुशीनगर
फिरोज अंसारी अश्क 9 टीवी भारत समाचार यूपी बिहार मीडिया
हिंदी केवल शब्द नहीं भारत की पहचान है। हिंदी दिवस के मौके पर नगर की साहित्यिक संस्था प्रभात सेवा समिति की मासिक काव्य गोष्ठी 3
94 सुदामा देवी काम्प्लेक्स पर संपन्न हुई ।अध्यक्षता बेनी गोपाल शर्मा व संचालन बेचू बीए ने किया।मुख्य अतिथि रहे रामनारायण, दिनेश यादव व हरे राम गुप्त ।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ मां शारदे के चित्र पर अतिथियों द्वारा पुष्पार्चन कर विनोद गुप्ता के सरस्वती वंदना से हुआ। उन्होंने अपनी रचना कुछ यूं सुनाया
” तूफानों से लड़ कर आना है कितना आसान नहीं” ‘अजय कुमार कुशवाहा -” नम आंखों से विदाई देते हैं आज”
सुनील कुमार अंकुर ने यह सुनाया
“जईसे राखत$ रहल$रखिह$ वोईसे धियान भईया”
धर्मेंद्र कुमार निर्मल
ने यह सुनाया “हिंदी केवल शब्द नहीं भारत की पहचान है ”
कन्हैयालाल करुण” बढ़ गई जब से आपस में पर्देदारी”
नूरुद्दीन नूर ने यह सुनाया” ना शिकवा है ना कोई गिला है” आशुतोष सैनी ने “यदि जीवन जरूरी है तो लगाओ पेड़ तुम इतना” मनोहर माही ने यह सुनाया” इंद्र बहुत याद आते हो ”
अंशदीप गुप्त पीयूष ने सुनाया-
“इतना मत सीखा ये जिंदगी”
फिरोज अश्क़ लक्ष्मीगंजवी ने खूब सुनाया-
“जो साहित्य के बुनियाद हैं बुनियाद रहेंगे-उजड़े हुए चमन में भी आबाद रहेंगे।
संचालन कर रहे बेचू बीए ने यह गीत सुनाकर इंद्रजीत इंद्र को श्रद्धांजलि अर्पित किया –
“मैं नदिया की वह धारा कब बह जाऊं पता नहीं” अध्यक्षता करें अध्यक्ष बेनी गोपाल शर्मा ने यह पढ़ा- ‘अपने संस्कारों की जननी है हिंदी ”
अंत में अतिथि रामनारायण, दिनेश यादव वह हरे राम गुप्त ने हिंदी दिवस व संस्था के अध्यक्ष स्वर्गीय इंद्रजीत इंद्र के व्यक्तित्व वह कृतित्व के संदर्भ में विस्तृत चर्चा किया ।साथ ही सभी कवियों ने स्व अध्यक्ष इंद्रजित जी के चित्र पर पुष्प अर्पित किया।




