प्रजापति समाज में चाक वितरण को लेकर रविंद्र नगर धूस विकास भवन सभागार कुशीनगर में अधिकारियों द्वारा हुआ साक्षात्कार

प्रजापति समाज में चाक वितरण को लेकर रविंद्र नगर धूस विकास भवन सभागार कुशीनगर में
अधिकारियों द्वारा हुआ साक्षात्कार
संवाददाता कुशीनगर
फिरोज अंसारी अश्क 9 टीवी भारत समाचार यूपी बिहार मीडिया 
खादीग्रामोद्योग के अधिकारियों के नेतृत्व में खादी ग्रामोद्योग माटी कला बोर्ड द्वारा प्रजापति समाज की महिलाओं और पुरुषों के लिए चाक वितरण को लेकर हुआ साक्षात्कार,जिसके जिसके नाम से चाक के लिए फॉर्म भरा गया था उन सभी लोगों का नाम लिस्ट में अधिकारियों द्वारा चिन्हित किया गया। साक्षात्कार में अखिल भारतीय प्रजापति कुंम्हकार महासंघ की प्रदेश अध्यक्षा एवं वृंदावन महिला उत्थान सेवा समिति सशक्त नरी परिषद की अध्यक्षा वृन्दा प्रजापति एवं कोषाध्यक्ष सीमा भारती जी भी महिलाओं के साथ उपस्थित रहीं, संबोधन में वृन्दा प्रजापति जी ने कहा कि मेरा उद्देश्य है महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना,खादी ग्रामोद्योग व्दारा महिलाओं एवं पुरुषों के लिए बहुत सारी योजनाएं हैं, वह अपनी संस्था द्वारा योजनाओं को महिलाओं के बीच ले जाकर महिलाओं को सशक्त और स्वावलंबी बनाने का काम करती हैं।महिलाओं को समाज में किस तरह हर क्षेत्र में आगे आना चाहिए यह महिलाओं को बताती हैं, इस समय वह अपने समाज की महिलाओं को आगे लाकर खादी ग्रामोद्योग द्वारा उन्हें रोजगार के लिए छोटे छोटे लोन, समूह बनवाकर महिलाओं के लिए बचत करवाने का काम उनकी संस्था कर रहीं है। घर बैठी हुई महिलाओं को मिट्टी का कार्य करने के लिए प्रेरित कर रहीं हैं कि घर बैठी महिलाएं भी अब मिट्टी का कार्य कर सकती हैं,मिट्टी का दिया और चाय वाला कुल्हड़ महिलाएं भी अब बनाना सीख गई हैं, जिससे वह अपने घर चलाने में सुचारू रूप से सहयोग कर सकती हैं, उन्होंने कहा कि अगर महिलाएं ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं है तो भी वह अपना काम सही तरीके से कर सकती हैं बस उनके अंदर काम करने का हौसला,हिम्मत और मजबूत इरादे होनी चाहिए, क्यों कि कला किसी की मोहताज नहीं होती है और वह कला महिलाओं में है बस उन्हें प्रोत्साहित करने की जरुरत है,अपने कला का उपयोग अपने घर पर बैठकर स्वरोजगार के रूप में कर सकती हैं, जिससे उन्हें परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा और वह आगे अपने परिवार को शिक्षित और खुशहाल बना सकती हैं,वही महिलाएं आगे चलकर एक सशक्त एवं स्वावलंबी समाज का निर्माण करेंगीं, अब समय वह नहीं रहा कि महिलाएं घर में दबकर रह जाती थीं अब महिलाएं भी जागरूक हो चुकी हैं वह अपनी जिविका चलाने के लिए अपनी मर्यादा में रहकर भी हर काम कर सकती हैं।




